एयरबस ने 2027 तक नई पीढ़ी के विमान के लिए हाइब्रिड पावर सिस्टम का सफल परीक्षण करने का लक्ष्य रखा

에어버스 차세대 항공기용 하이브리드 전력체계 개발…2027년 지상 실증 추진.jpg

एयरबस ने अगली पीढ़ी के वाणिज्यिक विमानों के लिए हाइब्रिड विद्युत शक्ति-प्रणाली विकसित करने की योजना तेज कर दी है। कंपनी LEIA नामक परियोजना के जरिए उच्च-वोल्टेज बिजली उत्पादन व वितरण, बैटरी एकीकरण और ऊर्जा प्रबंधन को एकीकृत प्रणाली के रूप में साबित करेगी। बहुराष्ट्रीय साझेदारों के साथ चल रही इस पहल का लक्ष्य 2027 में जमीनी स्तर पर व्यापक प्रदर्शन करना है।

LEIA का पूरा नाम Large Scale Integration Demonstrator of Hybrid Electrical Architecture है। यह यूरोपीय संघ के स्वच्छ विमानन कार्यक्रम क्लीन एविएशन जॉइंट अंडरटेकिंग के समर्थन से चल रहा है, जो कम-उत्सर्जन तकनीकों को बढ़ावा देने वाला सार्वजनिक-निजी उपक्रम है। फोकस छोटे और मध्यम दूरी के विमानों के लिए उच्च-वोल्टेज आर्किटेक्चर को पुर्ज़ा-स्तर से विमान-स्तर तक ले जाना और प्रमाणन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व एकीकरण की जांच करना है।

एयरबस के भविष्य विमान अनुसंधान-तकनीक प्रमुख करीम मोकादेम ने कहा, “LEIA 실증단계 진입은 미래 항공기 설계방식의 중요한 전환점” और “통합적이고 지능화된 하이브리드 전력구조를 통해 차세대 항공기의 물리적·디지털 기반을 구축하고 있다।” उनके अनुसार परिवर्तन केवल नए प्रोपल्शन तक सीमित नहीं है; विमान के भीतर बिजली के प्रवाह को वास्तविक समय में प्रबंधित करने और विभिन्न प्रणालियों की मांग-आपूर्ति को संतुलित करने वाला नया संचालन तंत्र भी जरूरी है।

यह परियोजना पहले चले SWITCH कार्यक्रम की उपलब्धियों पर आधारित है, जिसने हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन के उप-तंत्र विकसित किए। कॉलिन्स एयरोस्पेस ने जुलाई में इंटीग्रेटेड लैब परीक्षण पूरे किए, जबकि प्रैट एंड व्हिटनी, जीकेएन एयरोस्पेस और एमटीयू एरो इंजन भी विकास में साझेदार रहे। इन सत्यापित उप-तंत्रों को जर्मनी के ओट्टोब्रुन स्थित एयरबस के सतत प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग शोध केंद्र में विमान-स्तरीय एकीकरण परीक्षण के लिए स्थानांतरित किया जाएगा।

वहां उपकरणों को वास्तविक विमान-जैसी परिस्थितियों में जोड़कर वोल्टेज उतार-चढ़ाव, प्रणालियों के परस्पर हस्तक्षेप, ओवरलोड और आपात स्थिति में बिजली स्विच करने की क्षमता जैसी स्थितियों की जांच होगी। एयरबस विस्तारयोग्य मोटर-जनरेटर, नई पीढ़ी के पावर इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रक और बिजली वितरण उपकरणों को एकीकृत कर रहा है, जिनका व्यापक परीक्षण कार्यक्रम 2027 की जमीनी प्रदर्शनी पर जाकर समाप्त होगा।

यह प्रयास “मोअर इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट” रणनीति से भी जुड़ा है, जिसमें हाइड्रॉलिक और यांत्रिक प्रणालियों को विद्युत प्रणालियों से बदला जाता है। इससे वजन और रखरखाव का बोझ घटता है और ऊर्जा दक्षता बढ़ती है। हालांकि एयरोस्पेस में विद्युतीकरण चुनौतीपूर्ण है—उच्च शक्ति के साथ कम वजन, बहु-स्तरीय सुरक्षा, बैटरी की ऊर्जा घनत्व, उष्मा प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा जैसे मुद्दे हल करने होंगे।

LEIA की खासियत यह है कि यह केवल प्रोपल्शन नहीं, बल्कि पूरे विमान की विद्युत पारिस्थितिकी को परखेगा। उच्च-वोल्टेज बिजली का सुरक्षित उत्पादन, भंडारण और विभिन्न प्रणालियों को सुसंगत आपूर्ति सुनिश्चित होने पर ही भविष्य में हाइब्रिड या पूर्णत: विद्युत प्रोपल्शन का व्यावसायिक उपयोग संभव होगा।

परियोजना में एवीएल, कॉलिन्स एयरोस्पेस, यूरोपीय एरोनॉटिक्स साइंस नेटवर्क, फ्राउनहोफ़र अनुसंधान संघ, लीबहेर एयरोस्पेस, नीदरलैंड्स एयरोस्पेस सेंटर, सफरान, साफ़्ट, यूनिवर्सिटी ऑफ़ वॉरिक और व्रॉत्स्वाव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सहित संस्थान जुड़े हैं। बहु-देशीय आपूर्ति शृंखलाओं का समन्वय और तकनीकी प्रदर्शन के साथ प्रमाणन मानकों का मेल बिठाना इस परियोजना की प्रमुख चुनौती मानी जा रही है।

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