अमेरिका के मिशिगन राज्य में फार्मिंगटन हिल्स निवासी वयस्क डे-केयर केंद्र की संचालिका योलेन्डा मैथ्यूज़ (Yolanda Matthews) ने संघीय स्वास्थ्य बीमा ‘मेडिकेयर’ से धोखाधड़ीपूर्वक दावे करने की साजिश के आरोप में दोष स्वीकार कर लिया है। अभियोजन के अनुसार उसने मनोचिकित्सा सेवाएं न देने के बावजूद $539,000 से अधिक की फर्जी बिलिंग की, जिसमें मृत लाभार्थियों के नाम तक इस्तेमाल किए गए। सजा 18 नवम्बर 2026 को सुनाई जानी है और अधिकतम सजा 10 वर्ष कैद हो सकती है।
अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने 27 जुलाई को बताया कि मैथ्यूज़ ने स्वास्थ्य बीमा धोखाधड़ी की साजिश संबंधी आरोप में दोषी ठहरने की बात मानी। वह अपने केंद्र के लाभार्थियों के लिए वास्तव में प्रदान न की गई मनोचिकित्सा सेवाओं के दावे मेडिकेयर को बार-बार भेजती रही।
वयस्क डे-केयर केंद्र वे संस्थान हैं जहां बुजुर्गों और दिव्यांगों को दिन के समय देखभाल, सामाजिक गतिविधियां और बुनियादी स्वास्थ्य प्रबंधन जैसी सेवाएं मिलती हैं। मेडिकेयर अमेरिका की संघीय स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो मुख्यतः 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और कुछ दिव्यांगों को कवर करती है।
जांच में पाया गया कि कई दावे तब भी दाखिल किए गए जब संबंधित लाभार्थी अस्पताल में भर्ती थे और केंद्र में उपस्थित ही नहीं हो सकते थे। एक ऐसी समाजसेवी का नाम भी उपयोग किया गया जो पहले ही नौकरी छोड़ चुकी थी। यहां तक कि कुछ लाभार्थियों की मृत्यु के बाद भी, कागजों में मनोचिकित्सा सत्र जारी दिखाकर भुगतान मांगा गया।
यह मामला न्याय विभाग के “2026 राष्ट्रीय स्वास्थ्य-बीमा धोखाधड़ी अभियान” के दौरान उजागर हुआ। जून में हुई इस कार्यवाही में डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों समेत 455 आरोपितों पर मुकदमा दायर किया गया, और कथित फर्जी दावों का कुल आकार $6.5 अरब से अधिक बताया गया। इसमें सरकारी व निजी बीमा पर झूठे दावे, अनावश्यक उपचार, मरीजों को फुसलाना, अवैध कमीशन और ओपिऑयड से जुड़ी आपराधिक गतिविधियां भी शामिल थीं।
इस प्रकरण की जांच एफबीआई के डिट्रॉयट फील्ड ऑफिस और अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के निरीक्षक जनरल के दफ्तर (HHS-OIG) ने की, जबकि अभियोजन DOJ की क्रिमिनल डिविजन के फ्रॉड सेक्शन ने संभाला। अंतिम सजा संघीय सजा-निर्धारण मानकों, फर्जी दावों के आकार व अवधि, अवैध आय, पूर्व आपराधिक इतिहास और जांच में सहयोग जैसे पहलुओं पर निर्भर करेगी। दोष स्वीकार करना अधिकतम सजा की गारंटी नहीं है, हालांकि मृतक और पूर्व-कर्मचारी के नामों के दोहराए गए इस्तेमाल को सजा निर्धारण में प्रतिकूल माना जा सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब बीमा दावों की समीक्षा केवल कागजी रिकॉर्ड और पेशेवरों के पंजीकृत नामों पर टिकी हो, तो ऐसी धोखाधड़ी लंबे समय तक पकड़ से बाहर रह सकती है। अस्पताल में भर्ती और मृत्यु संबंधी रिकार्ड, सेवा उपस्थिति और कर्मचारियों की पात्रता सूचनाओं का रियल-टाइम मिलान, साथ ही एक ही समय में अलग-अलग स्थानों पर सेवाएं दिखाने जैसे असामान्य पैटर्न की स्वचालित पहचान—ऐसी कमजोरियों को घटाने के लिए जरूरी मानी जा रही है।



